इकरा हसन को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत, चुनाव आचार संहिता मामले में ट्रायल पर रोक
08-09-2026

Iqra Hasan: कैराना सांसद इकरा हसन को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। वर्ष 2024 के चुनाव आचार संहिता उल्लंघन से जुड़े मामले में कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की पूरी कार्यवाही पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। दरअसल, इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने इकरा हसन को समन जारी किया था, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जस्टिस विक्रम डी चौहान की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट की संपूर्ण कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश दिया है।
समन को हाईकोर्ट में दी चुनौती
इकरा हसन ने ट्रायल कोर्ट की ओर से जारी समन को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मामले की आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश दिया। मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम डी चौहान की सिंगल बेंच ने की। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगले आदेश तक ट्रायल कोर्ट में इस मामले से जुड़ी संपूर्ण कार्यवाही पर रोक रहेगी। इस आदेश के बाद सांसद इकरा हसन को फिलहाल इस मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई से राहत मिल गई है।
कांधला थाने में दर्ज हुई थी FIR
यह मामला शामली जिले के कांधला थाने में दर्ज FIR से जुड़ा है। इकरा हसन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 188 और 171H के तहत मामला दर्ज किया गया था। दोनों धाराओं के तहत चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़े आरोप लगाए गए थे। मामले में ट्रायल कोर्ट के स्तर पर सुनवाई आगे बढ़ी और इकरा हसन को समन जारी किया गया। इसके बाद सांसद ने समन जारी करने की कार्यवाही को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने लगाई पूरी रोक
हईकोर्ट ने सांसद की याचिका पर सुनवाई करते हुए फिलहाल ट्रायल कोर्ट की पूरी कार्यवाही रोक दी है। कोर्ट का यह आदेश अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। यानी इस मामले में ट्रायल कोर्ट के स्तर पर फिलहाल आगे की कार्यवाही नहीं की जाएगी। इकरा हसन की ओर से हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता इमरान उल्ला और मोहम्मद खालिद ने पक्ष रखा।
चुनाव आचार संहिता से जुड़ा मामला
मामला साल 2024 के चुनाव से जुड़ा है। FIR में इकरा हसन पर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप लगाए गए थे। कांधला थाने में मामला दर्ज हुआ था। ट्रायल कोर्ट से समन जारी होने के बाद सांसद ने कानूनी रास्ता अपनाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। अब हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की संपूर्ण कार्यवाही पर रोक लगा दी है। फिलहाल हाईकोर्ट के इस आदेश से इकरा हसन को बड़ी राहत मिली है। मामले में आगे की स्थिति हाईकोर्ट के अगले आदेश के बाद साफ होगी।
राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की क्या है ज़मीनी हक़ीक़त? – ग्राउंड रिपोर्ट

18 सितंबर, रात के क़रीब 11 बजने वाले हैं. खाने-पीने के लिए मशहूर इंदौर का सर्राफा मार्केट रोज़ाना की तरह गुलज़ार है. मुख्य सड़क के दोनों तरफ़ खाने के स्टॉल सजे हैं और लोगों की भीड़ है.
इसी भीड़ के बीच स्टूडेंट्स का एक झुंड बार-बार मुख्य सड़क के चक्कर लगा रहा है और तालियों की थाप के साथ नारे लगा रहा है – “गूंज है भाई गूंज है, छात्रों की गूंज है.”
यही स्टूडेंट्स कुछ देर पहले गिटार के साथ जैमिंग सेशन कर रहे थे और युवाओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे.
बात करने पर पता चला कि ये सभी युवा यूथ कांग्रेस से जुड़े हैं और बीते 15 दिनों से शहर के अलग-अलग हिस्सों में जाकर स्टूडेंट्स को जोड़ रहे हैं, ताकि राहुल गांधी के “छात्रों की गूंज” कार्यक्रम को ‘हिट’ बनाया जा सके.
लेकिन क्या युवा वाक़ई राहुल गांधी के इस कार्यक्रम से ख़ुद को जुड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं? अलग-अलग शहरों में पेपर लीक से लेकर, परीक्षा में अनियमितता, महंगी होती पढ़ाई, बेरोज़गारी, यहां तक कि पितृसत्ता को उखाड़ फेंकने की बात करने वाले राहुल गांधी की बातों को युवा कैसे देखते हैं? और क्या यही है- छात्रों की असली गूंज?

ये समझने के लिए हमने इंदौर में आयोजित हुए ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को कवर किया. यहां पहुंचने वाले युवाओं से बात की और उन युवाओं से भी जो शहर के अलग-अलग इलाक़ों में रहते हैं.
तो 19 सितंबर यानी इंदौर में जिस दिन राहुल गांधी का कार्यक्रम हुआ, उस दिन मैं शहर के भंवरकुआं इलाक़े में गई. मुझे बताया गया था कि यहां बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स रहते हैं.
मेरी मुलाक़ात यहां ऐसी कई छात्राओं से हुई जो राहुल गांधी के इंदौर आने और यहां पर स्टूडेंट्स से संवाद करने को लेकर खुश
कन्नड़ एक्टर को मिलेगा दादा साहेब फाल्के पुरस्कार; जानें कौन हैं अनंत नाग, जिन्होंने 300 से ज्यादा फिल्मों में किया अभिनय
भारत
16-09-2026

भारत सरकार ने कन्नड़ फिल्मों के वरिष्ठ अभिनेता अनंत नाग को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान और पीढ़ियों को प्रेरित करने वाले सिनेमाई सफर के लिए वर्ष 2024 का प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के पुरस्कार देने की घोषणा की है। सरकार ने दादा साहेब फाल्के पुरस्कार चयन समिति की अनुशंसा पर यह निर्णय लिया है। यह पुरस्कार भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान है, जो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्वारा दिया जाता है। यह सम्मान कन्नड़ सिनेमा के लिए ऐतिहासिक है।
तीन दशक बाद कन्नड़ एक्टर को मिलेगा पुरस्कार
अभिनेता अनंत नाग को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिलना कन्नड़ सिनेमा के लिए काफी अहम है। साल 1969 में शुरू हुए इस पुरस्कार के 57 वर्षों के इतिहास में कन्नड़ फिल्म जगत से अब तक केवल डॉ. राजकुमार (1995) को यह सम्मान मिला था। अनंत नाग के नाम के साथ 3 दशक बाद कन्नड़ सिनेमा की दूसरी बार इस सूची में वापसी हो रही है।
मलयालम अभिनेता को मिल चुका यह पुरस्कार
पिछले वर्ष मलयालम अभिनेता मोहनलाल को 2023 का फाल्के पुरस्कार 23 सितंबर 2025 को 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रदान किया था। 65 वर्ष की उम्र में मोहनलाल यह सम्मान पाने वाले सबसे कम आयु के कलाकार बने थे। 4 सितंबर 2026 को 78 वर्ष पूरे कर चुके अनंत नाग को यह पुरस्कार 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में मिलेगा। वर्ष 2024 के लिए 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा 18 जुलाई 2026 को हुई थी, जिसमें ‘आर्टिकल 370’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म और ‘कल्कि 2898 एडी’ को सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म चुना गया था।
कौन हैं अनंत नाग?
अनंत नाग का वास्तविक नाम अनंत नागरकट्टे है। उनका जन्म 4 सितंबर 1948 को कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के भटकल तालुक स्थित शिराली में एक कोंकणी भाषी परिवार में हुआ। माता-पिता आनंदी और सदानंद नागरकट्टे थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा दक्षिण कन्नड़ के आनंदाश्रम और उत्तर कन्नड़ के चित्रापुर मठ के संरक्षण में हुई।
आगे की पढ़ाई के लिए वे बॉम्बे भेजे गए, जहां 8 साल तक शौकिया रंगमंच से जुड़े रहे। रंगमंच निर्देशक सत्यदेव दुबे ने उन्हें श्याम बेनेगल से मिलवाया और यहीं से उनका सिनेमाई सफर शुरू हुआ। अनंत नाग, दिवंगत निर्देशक-अभिनेता शंकर नाग के बड़े भाई हैं। रंगमंच की सुपरिचित अभिनेत्री अरुंधती नाग उनकी भाभी हैं। उनका विवाह 1987 में गायत्री से हुआ।
पांच दशक, 300 से अधिक फिल्में
अनंत नाग ने फीचर फिल्मों में पदार्पण 1973 में प्रो. पी. वी. नंजराज उर्स की कन्नड़ फिल्म ‘संकल्प’ से किया, जिसने कर्नाटक में सात राज्य पुरस्कार जीते। समानांतर सिनेमा में उनकी एंट्री श्याम बेनेगल की ‘अंकुर’ (1974) से हुई। इसी दौर में उन्होंने बेनेगल की ‘निशांत’ (1975), ‘मंथन’ (1976), ‘भूमिका’ (1977), ‘कोंडुरा’ (1977) और ‘कलयुग’ (1981) में काम किया। एम. एस. सथ्यू और गिरीश कर्नाड जैसे फिल्मकारों के साथ भी उन्होंने काम किया।
पांच दशक के करियर में उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया, जिनमें 200 से ज्यादा कन्नड़ फिल्में हैं। इसके अलावा हिंदी, तेलुगू, तमिल, मलयालम, मराठी और अंग्रेजी फिल्मों में भी वे नजर आए। उनकी चर्चित कन्नड़ फिल्मों में ‘बयलु दारी’ (1976), ‘कन्नेश्वर राम’ (1977), ‘ना निन्ना बिडलारे’ (1979), ‘चंदनदा गोंबे’ (1979), ‘बेंकिया बले’ (1983), ‘हेंडतिगे हेलबेडी’ (1989), ‘गणेशन मदुवे’ (1990), ‘गौरी गणेश’ (1991), ‘मुंगारु माले’ (2006), ‘गोधी बन्ना साधारण मैकट्टु’ (2016), ‘राजकुमार’ (2017), ‘केजीएफ: चैप्टर 1’ (2018), ‘केजीएफ: चैप्टर 2’ (2022) और ‘गालीपटा 2’ (2022) शामिल हैं। ‘गोधी बन्ना साधारण मैकट्टु’ में अल्ज़ाइमर से जूझते व्यक्ति के किरदार को समीक्षकों ने बेहद सराहा और इस प्रायोगिक फिल्म को व्यावसायिक सफलता भी मिली। छोटे पर्दे पर अनंत नाग आर. के. नारायण की कहानियों पर आधारित दूरदर्शन की मशहूर श्रृंखला ‘मालगुडी डेज’ में दिखे, जिसका निर्देशन उनके छोटे भाई शंकर नाग ने किया था।
अनंत नाग को मिल चुके कई पुरस्कार
अनंत नाग नाम 6 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स साउथ और पांच कर्नाटक राज्य फिल्म पुरस्कार हैं। राज्य का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार उन्हें ‘मिंचिना ओट’ (1979-80), ‘होसा नीरु’ (1985-86), ‘अवस्थे’ (1987-88) और ‘गंगव्वा गंगामयी’ (1994-95) के लिए मिला। 2011-12 में उन्हें डॉ. विष्णुवर्धन लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और 2007 में राज्योत्सव पुरस्कार मिला।
जनवरी 2025 में सरकार ने उन्हें कला के क्षेत्र में पद्म भूषण देने की घोषणा की, जो राष्ट्रपति ने 27 मई 2025 को प्रदान किया। राजनीति में भी वे सक्रिय रहे। 1970 के दशक से जनता पार्टी के प्रयोग से जुड़े रहे, 1988 से 1994 तक कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य रहे, 1994 में विधायक चुने गए और 1996 से 1999 तक मुख्यमंत्री से संलग्न राज्य मंत्री रहे।
दादा साहेब फाल्के पुरस्कार का इतिहास
यह पुरस्कार 1969 में भारतीय सिनेमा के जनक धुंडीराज गोविंद फाल्के (1870-1944) की जन्मशती के वर्ष में शुरू किया गया था। फाल्के ने 1913 में देश की पहली पूर्ण लंबाई की फीचर फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ बनाई थी। पुरस्कार “भारतीय सिनेमा की वृद्धि और विकास में उत्कृष्ट योगदान” के लिए दिया जाता है और चयन फिल्म जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों की विशेष समिति करती है। इसके लिए कोई आवेदन या प्रविष्टि नहीं मांगी जाती।
पहली विजेता अभिनेत्री देविका रानी थीं, जिन्हें 17वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में सम्मानित किया गया। पुरस्कार में स्वर्ण कमल पदक, शॉल और प्रमाण पत्र के साथ नकद राशि दी जाती है। वर्षों से यह राशि 10 लाख रुपये रही, लेकिन 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के आधिकारिक नियमों के मुताबिक इसे 15 लाख रुपये कर दिया गया है।
मरने के बाद दो अभिनेताओं को मिला था पुरस्कार
अब तक केवल दो एक्टर्स को मरणोपरांत पुरुस्कार मिला है। इसमे पृथ्वीराज कपूर (1971) और विनोद खन्ना (2017) शामिल हैं। पृथ्वीराज कपूर की ओर से पुरस्कार उनके बेटे राज कपूर ने लिया, जो 1987 में स्वयं भी इस सम्मान के विजेता बने।इस लिस्ट में 4 जोड़े भाई-बहनों के हैं। बी. एन. रेड्डी (1974) और बी. नागी रेड्डी (1986); राज कपूर (1987) और शशि कपूर (2014); लता मंगेशकर (1989) और आशा भोसले (2000); बी. आर. चोपड़ा (1998) और यश चोपड़ा (2001)।
अब तक कितने लोगों को मिला पुरस्कार?
1969 (देविका रानी) से 2023 (मोहनलाल) तक यह पुरस्कार 55 हस्तियों को दिया जा चुका है। इस सूची में मिथुन चक्रवर्ती 54वें विजेता थे, जिन्हें 2022 का पुरस्कार 8 अक्टूबर 2024 को 70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में मिला। मोहनलाल 55वें विजेता बने। इस लिहाज से अनंत नाग दादा साहेब फाल्के पुरस्कार के 56वें विजेता होंगे। विजेताओं में अब तक 8 महिलाएं शामिल हैं। देविका रानी, रूबी मायर्स (सुलोचना), कानन देवी, दुर्गा खोटे, लता मंगेशकर, आशा भोसले, आशा पारेख और वहीदा रहमान को यह पुरस्कार मिल चुका है।
यूपी हाथरस न्यूज: 6 साल से घर में कैद, भुखमरी की नौबत, पीड़ित परिवार की दर्दभरी आपबीती
27-08-2026

Hathras Rape Victim Family Home Jail: उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के बूलगढ़ी गांव में 2020 में हुई दलित युवती की सामूहिक बलात्कार और मौत की घटना के छह साल बीत चुके हैं। पीड़िता के परिवार का कहना है कि चौबीसों घंटे सुरक्षा के बावजूद उनकी जिंदगी अब घर में जेल जैसी हो गई है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि इन वर्षों में कोई सामाजिक जीवन नहीं रहा। कोई उनसे मिलने नहीं आता और परिवार का कोई सदस्य बाहर जाकर रोजी-रोटी नहीं कमा सकता। आर्थिक संकट इतना गहरा है कि परिवार भूखमरी की कगार पर पहुंच चुका है।
अमेरिका ने पहली बार अंतरिक्ष में तैनात किए हथियार
15 सितंबर 2026
अमेरिका ने पृथ्वी की कक्षा में ‘अंतरिक्ष हथियार’ तैनात करने की पुष्टि की है. यह पहली बार है जब अमेरिका ने इस तरह की आक्रामक क्षमताओं को स्वीकार किया है.

अमेरिकी एयर फ़ोर्स के सचिव ट्रॉय मींक ने कहा कि दुश्मन पर नज़र रखने के लिए ये हथियार ज़रूरी हैं.
सोमवार को वायु, अंतरिक्ष और साइबर सम्मेलन में बोलते हुए, मींक ने कहा कि अमेरिका “विकसित होते ख़तरों” के लिए तैयार है.
लेकिन मींक ने हथियार की क्षमताओं या इसे कक्षा में कब स्थापित किया गया था, इस बारे में विस्तार से नहीं बताया.
अमेरिका के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने पहले भी कहा है कि वे अंतरिक्ष में सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने की योजना बना रहे हैं.
इन अधिकारियों ने भविष्य के संघर्ष में अमेरिकी सैटेलाइट्स पर हमला करने और उन्हें बाधित करने के तरीके़ विकसित करने वाले रूसी और चीनी कार्यक्रमों का हवाला दिया है.

चीन ने क्या दिया है जवाब
चीन ने मंगलवार को अंतरिक्ष में “हथियारों की होड़” के ख़िलाफ़ चेतावनी देकर इसका जवाब दिया है.
एएफ़पी ने चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से कहा, “हम अमेरिकी पक्ष से गुज़ारिश करते हैं कि वह अपनी सैन्य क्षमताओं का विस्तार करना और अंतरिक्ष में युद्ध की तैयारी करना बंद करे.”
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नोट: यह ख़बर सोशल मीडिया से लिया गया है
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